Monday, 5 October 2020

 "आज की नारी"

प्रातः सबसे पहले उठ जाती है।
सबको सुला फिर अंत मे सोती है।।
बालको की चिंता में सदा रहती।
जीवन मे पल पल एक नया जीवन जीती।।
कब वो कन्या से बेटी, बेटी से पत्नी और पत्नी से माँ बन जाती।
हर रूप में वो तो ढलती ही जाती।।
अपना घर छोड़ दूसरे घर को सींचती ।
ताने सहती रहती ,पर कुछ न कहती।।
संस्कृति जिसके कंधो पर है विराजती।
घर के साथ आज समाज मे भी अग्रसर रहती।।
अब वो भी किसी पर न निर्भर रहती।
घर के साथ साथ देश को भी है चलाती।।
नमन है इस शक्ति को नमन है इस भक्ति को।
नमन उसके योगदान को नमन उसके बलिदान को।।
आज वो इंदिरा नुई, पी टी उषा , सुषमा स्वराज, सीतारमण कहलाती।
वो है आज की नारी जिससे हर असम्भव बात सम्भव हो जाती।।
मनोज शर्मा "मन"

No comments:

Post a Comment