अब मौन बहुत हो गया।
अब मौन बहुत हो गया।
अब वक्त है मुखर होने का।।
अब श्रद्धांजलियां बहुत हो गई।
अब वक्त है बलि लेने का।
अब बातचीत और गले बहुत लग लिये।
अब वक्त है अजगर को दफन करने का।।
अब गालिया सुना सेना को बहुत हो गया।
अब वक्त है पत्थरबाजों को सबक सिखाने का।।
अब शांति पर चलने का समय बहुत हो गया।
अब वक्त है दुश्मन को उसकी औकात बताने की।
सीमा पर अब शांति बहुत हो गई।
अब वक्त है इन सीमाओ को फिर से मिलाने का।
धर्मनिरपेक्षता, शांति, 370 का समय बहुत हो गया।
अब वक्त है उनको उनकी भाषा मे सबक सिखाने का।।
आतांकियो के लिये दया धर्म बहुत हो गया।
अब वक्त है सेना को भी छूट दे अब सीमा पार जाने की।
अजगर अजगर होता है पालतू हो या जंगल मे हो।
कितना भी पुचकार लो वो रहेगा फिराक में निगल जाने की।।
जनता फौजी युवा सभी दे रहे एक आवाज़।
अब नही किया इन्हें ज़मीन में दफन, फिर नही घड़ी ये आने की।।
मनोज शर्मा "मन""
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