Monday, 5 October 2020

  सड़क दुर्घटना

सड़क दुर्घटना रोज़ मर्राह का हिस्सा है जिंदगी का। अक्सर हम कही जा रहे होते है तो अक्सर सड़क के साइड में भीड़ देखते है और सोचते है किसी की दुर्घटना हो गई है शायद ,थोड़ी उत्सुकता रहती है गाड़ी रोक कर पूछते है तो कोई बताता है और हम जानकारी लेकर निकल जाते है। रास्ते मे सोचते हुए कोई न कोई आ जायेगा इनकी सहायता के लिये दुनिया मे अच्छे लोग भी है। कुछ लोग इसलिये भी डरते है कि कौन पुलिस के लफड़ो में पड़े। एक तो सहायता करो और फिर कानूनी उलझनों में फँसो। फिर किसी अस्पताल में ले जाओ तो फिर उसके साथ खड़े रहो। प्राइवेट में गये तो बिल कौन देगा। अब कौन झंझट में पड़े।
हमारे क्षेत्र में एक व्यक्ति है जो साहिबाबाद में रेस्टोरेंट चलाते है वो शाम को घर निकले तो रास्ते मे देखा किसी की दुर्घटना हो गई है। उन्होंने पूछा तो किसी ने बताया किसी मोटर साईकल वाले को ट्रक वाला ठोक गया है। हालत गंभीर है। और वो वहां से जल्दी थी घर आने की। वो इतनी जानकारी लेकर अपने घर को चल दिये।
घर पहुचे तो घर मे कोहराम मचा था। पूछा तो छोटे भाई का एक्सीडेंट हुआ है चोट ज्यादा लगी फोन आया है तो वो फ़ौरन उस और की और गये। भाई को लेकर हॉस्पिटल पहुचे तो उन्हें बताया गया कि आप पहले ले आते तो हम उनको बचा लेते। तो उस व्यक्ति की हालत शून्य हो गई और रोते रोते कह रहे थे काश मैं रुक कर देख लेता तो मेरा भाई मेरे साथ होता।
आज सरकार ने कानून बना दिया है कि आप घायल को सीधा पुलिस को सूचित करें या अस्पताल ले जाये आपसे कोई पूछताछ नही की जायेगी। न कोई पेपर वर्क ही किया जायेगा। आपकी वजह से किसी आदमी की जान बच सकती है। वो आपका कोई अपना भी हो सकता है और आप खुद भी हो सकते है।
तो जब भी हम ऐसी घटना को देखे तो उसे इग्नोर न करे। जो सहायता बन पड़ सकती है। करे।
मनोज शर्मा "मन"

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