Monday, 5 October 2020

 "पौने छह बजे"

शर्मा जी को संगठन की बैठक में महीने के पहले वीरवार को पंचकुइयां रोड कार्यालय पर 06.30 बजे प्रातः जाना होता था। कभी चले जाते कभी मिस कर देते। सर्दियों में तो अक्सर मिस ही हो जाता था। प्रातः 06.30 बजे पहुँचने के लिये घर से 05.30 बजे निकलो और 05.30 बजे पहुँचने के लिये प्रातः 04.30 बजे का अलार्म लगाओ। सर्दियों में अक्सर छूट जाती थी बैठके। 5 वर्ष हो गये थे जाते जाते।
तब फिर निगम के चुनाव आये । संगठन के एक अधिकारी शर्मा जी के क्षेत्र के ही इंचार्ज बने। बहुत ही अनुभवी कर्मठ 75 वर्ष की उम्र में भी युवा से ज्यादा चुस्त।उनके सहयोगी के रूप में शर्मा जी को जिम्मेदारी मिली। दिखने में बहुत कड़क पर बोली में बहुत सरल। आवाज़ काफी दमदार थी। वो भी बैठक में जाते थे वीरवार को।
एक दिन हेमराज जी का फोन आया शर्मा जी के पास की कल चलना है प्रातः बैठक में तो क्या कार्यक्रम है। शर्मा जी ने न जाने का मन बना रखा था। शर्मा जी ने कहा एक विवाह में जाना है आने में लेट हो जाऊंगा तो वो बोले मुझे भी एक विवाह में जाना है। तो फिर क्या हुआ हम लोग स्वयंसेवक है और तुम तो युवा हो। मैं ठीक पौने छह बजे अपने निवास के बाहर मिलूंगा। शर्मा जी क्या कहते। अधिकारी थे। बात माननी ही थी। प्रातः 04.30 बजे का अलार्म लगाया। रात्रि को 12 बजे विवाह से वापस आये थे पर सुबह उठे और पहुँच गये ठीक पौने छह बजे। गजब की फुर्ती थी। वो बाइक के पीछे बैठे और बातें चल पड़ी।
उन्होंने बताया कि उन्हें 40 वर्ष हो गए बैठक में जाते जाते। आज तक कभी लेट नही हुआ । शर्मा जी हु हु करते उनकी बातों को सुनते चले जा रहे थे। बीच बीच मे जैसे ही बाइक तेज़ करते वो कहते आराम से चलो कोई जल्दी नही है। रेड लाइट पर रुकने के लिये कहते। फिर वो बताते कैसे विभाग से और आज तक कैसे कार्य किया।
बैठक में पहुँचकर एक अधिकारी मिले तो उन्होंने हेमराज जी से कहा कि बाइक पर आपको तो गाड़ी में आना चाहिये था। वो जोर से हंसे और अंदर चल दिये।
फिर वापसी में उन्होंने कहा तुम्हे आज दरियागंज की बढ़िया लस्सी पिलवाते है। और चलने के लिये कहा। उनकी बात मतलब आदेश होती थी। शर्मा जी ने बाइक मोड़ ली उस तरफ। फिर दोनों ने लस्सी पी।वापसी में वो अपने कुछ पुराने साथियों के निवास पर भी गये। उन्होंने बताया ये उनका नियम है कि जब बैठक में जाओ तो दो साथियों से घर पर मिलकर आओ। अब हर माह के प्रथम वीरवार को उनका रात्रि में फोन आ जाता। अब सर्दियां बड़ गई थी। शर्मा जी कैब कर लेते और पहुँच जाते। वापसी में कोई मिल जाता था जिसके साथ वो और मैं आ जाते। पर वापसी में वो अपना शेयर कैब का मेरी जेब में डालना नही भूलते ।
एक दिन उनका फोन आया कि दिनेश जी भी बैठक में जाएंगे। वो ड्राइवर के साथ मेरे निवास पर आएंगे तो तुम भी बाइक यही खड़ी कर देना साथ मे चलेंगे। उनकी बात मतलब आदेश । प्रातः उनके निवास के बाहर बाइक खड़ी कर देता। और उनके साथ गाड़ी में बैठकर शर्मा जी चले जाते। इस तरह कई वर्ष बीत गए। हेमराज जी से बिल्कुल जुड़ाव हो गया था। उनकी वजह से शर्मा जी भी अनुशासित हो गए थे। कोई भी बात उनसे बेहिचक कर लिया करते थे।
एक दिन उनके निवास के पड़ोस में ही शर्मा जी के मित्र कमल जी आये ।कोरोना का काल चल रहा था तो अब बैठकों में कई महीनों से आना जाना नही हो रहा था। अब ऑनलाइन बैठके ही चल रही थी। उन्होंने बताया कि हेमराज जी अस्पताल में दाखिल है वो उनके साथ ही जलबोर्ड आफिस के डॉक्टर से लिखवाकर अस्पताल में दाखिल हुये है। डॉ. ने कहा है आपकी एक किडनी में समस्या है।इसे निकलवा दे वरना दूसरी भी खराब हो जाएगी। अब उनकी सर्जरी हो गई है अब वो ठीक है। 3 दिन हो गए है।
उसी दिन शाम को कमल जी का फोन आया कि हेमराज जी का देहांत हो गया है। शर्मा जी हतप्रभ हो गए। 2 मिनट तक खामोश। फिर पूछा कैसे सुबह तो तुम मिले थे बता रहे थे कि वो ठीक है तो एक दम कैसे। कमल जी ने बताया सुबह तक वो ठीक थे। पर शाम को उनको दिल सम्बन्धी समस्या हुई और वो नही रहे।
शर्मा जी को बड़ा झटका लगा। जैसे आज फिर से परिवार कोई बड़ा मार्गदर्शक ,प्यार करने वाला जो अब अगले माह कोरोना काल के बाद वीरवार को फोन करके नही कहेगा।कि पौने छह बजे मेरे निवास पर आ जाना साथ चलेंगे। शर्मा जी उनके साथ बीते पलो में कही खो गए।
मनोज शर्मा "मन"

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