नन्हा वानर
आज सुबह योग के समय एक रोचक घटना घटी जब हम योग करने के बाद अंत मे प्रार्थना कर रहे थे। तब कही से ये वानर का बच्चा आ गया छोटा था। 2 कुत्ते इसके पीछे थे। मैं लाइन में बीच मे खड़ा था । ये वानर का बच्चा उनसे बचने के लिये सीधा मेरे पैरों में आकर चिपक गया। और दोनो कुत्ते एक दम इस पर लपकने के लिये तैयार थे। धर्मसंकट खड़ा हो गया था कि प्रार्थना को बीच मे नही रोका जाता चाहे आंधी आ जाये चाहे वर्षा । पर ये था कि इसको कुत्ते मार देंगे। एक दम से निर्णय किया कि इसकी जान बचानी जरूरी है। सभी को इशारा किया प्रार्थना रोकने का और उन कुत्तों को बाहर भगाया। फिर एक आदमी को गेट पर खड़ा किया कि कुत्ते अंदर न आ सके। और प्रार्थना सुचारू चल सके और ये बालक भी सुरक्षित रहे। प्रार्थना हो गई फिर हमारे मित्र तरुण जी और नताशा जी के घर कीर्तन हुआ था तो वो प्रसाद लेकर आये थे। सभी ने उन्हें चखा और इस नए मेहमान ने भी हमारे साथ बैठकर प्रसाद लिया। अब लगता है इसे हम पर ज्यादा विश्वास हो गया है। वो फिर वृक्षो पर होता चला गया। लगता है कल भी आयेगा।
मनोज शर्मा "मन"
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