Tuesday, 6 October 2020

 कहानी

सबक

ये कहानी है बचपन के मित्रो की जो साथ पढ़े , खेले और बड़े हुये। एक बना बड़ा बिजनेसमैन दूसरा अध्यापक और तीसरा मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर। सब अच्छा चलता रहा। खेलकूद, मस्ती, जन्मदिन पार्टियां सब कुछ अच्छा चलता रहा।

तभी विनोद जिसका व्यापार कई देशों में था। जब वो अमेरिका में था। तब वो दोस्त जो अध्यापक था उसका फोन आया यार एक अमेरिका से इस बार एक अच्छा सा मोबाइल लेकर आ जाना। विनोद ने पूछा कितनी रेंज तक चलेगा तो सुरेश ने कहा जो तुझे ठीक लगे। विनोद ने एक अच्छा सा फ़ोन जो 70,000 रुपये का था वो ले लिया और साथ मे बिल भी। और फिर अपने काम मे व्यस्त हो गया।

वापस जब आया तो अपने मित्र सुरेश से बोला उसे फोन दिया और साथ मे बिल भी। सुरेश ने विनोद का धन्यवाद भी किया। और फिर बात आई गई हो गई। फिर वो पार्टियां ,मस्तिया मीटिंग्स चलती रही। काफी समय बीत गया । अब तीनो मित्रो का विदेश भृमण का कार्यक्रम बना। तीनो ने पचास पचास हजार मिलाए कार्यक्रम बन गया। टीचर सुरेश के पैसे देवेंद्र ने अपने पास से विनोद को दे दिये। तैयारियां हो चुकी थी। परंतु किसी कारणवश वीज़ा न मिलने से देरी हो गई और कार्यक्रम निरस्त हो गया।

अब देवेंद्र ने पैसे वापस लेने को कहा। विनोद ने कहा बैठते है। विनोद ने देवेंद्र के पचास हजार दे दिये। तो देवेंद्र ने सुरेश के भी पचास हजार देने के लिये कहा टैब विनोद ने कहा कि मैंने सुरेश से मोबाइल के 70,000 लेने है। ये पचास उसमे एडजस्ट हो गये।

देवेंद्र ने सुरेश को बता दिया अब सुरेश ने कहा कि वो फ़ोन तो विनोद ने मुझे गिफ्ट किया था। उसने विनोद को फोन किया कि मैंने तेरे भतीजे को बचपन मे फ्री पढ़ाया था तो फीस नही ली थी। फिर विनोद ने कहा कि जब तेरा मकान बन रहा था तो तो मैंने अपना नया फ्लोर रहने के लिये दिया था तो उसका किराया नही लिया था। ।

अब ये दोस्ती नया रूप ले रही थी। सारे गढ़े मुर्दे उखाड़ रही थी। वो पार्टियां, मस्तिया खत्म हो रही थी। वो लंबी दोस्ती की बाते तू तड़ाक पर जा रही थी। और गुस्से में दोनो की आवाज़ तीखी होती जा रही थी। और गुस्से में दोनो ने फोन रख दिया। ऐसे में विनोद को एक बात समझ नही आ रही थी कि दोस्ती में पैसा भी गया और आज तक जो भी किया वो भी मिट्टी में गया। पैसा मांगना भी बुरा  हो गया। पर एक सबक उसको मिल गया था कि दोस्ती में पैसे का कोई लेन देन नही करना। चेहरे पर गंभीर यादें दिल मे लिये अपनी गाड़ी स्टार्ट कर चल दिया उन्ही बचपन की यादों में ....।

मनोज शर्मा "मन"

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