मधुमक्खी से सीखे कैसे जीना
हमे अपना जीवन कैसे जिये मधुमक्खी से सीखना चाहिये, शहद भी बनाना और सामने वाले के मन मे डर भी बना कर रखना की ये संगठन में रहती है और हमला भी कर सकती है। जब शहद तैयार हो जाता है ये फिर दूसरा छःत्ता शहद का तैयार करने लगती है। लेकिन ये करती संगठन में रहकर ही है। और इसमें सारा श्रेय प्रत्येक मधुमक्खी को जाता है। हर मधुमक्खी का काम बंटा होता है। इसी को संगठन भी कहते है।
कई बार हम मिलते है कार्यकर्ता सिर्फ अपने बारे में बखान करता रहता है मैंने ये किया मैंने वो किया। इसका मतलब वो संगठन में रहते हुये भी और ऊंचे दायित्वों पर होंने के बाद भी अपनी व्यक्तिगत महत्वकांक्षाओं पर पार नही पा सका।
कार्यकर्ता वही जो जब मिले तो हम का सम्बोधन करे। कि हमने मिलकर या हमारे संगठन को सर्वोपरि रखे। अपने नाम की जगह संगठन को अहमियत दे। उसमे सदा देने का भाव रहे। जैसा मधुमक्खियों में रहता है। वो शहद समाज को देती है। इसके बदले में कुछ नही लेती है यहां तक कि उनको उस शहद का श्रेय भी नही मिल पाता है।
हमे अपने जीवन मे भी शहद भी बनाते रहना चाहिये और कोई ये भी न समझे हम अकेले है तो संगठन में भी रहना चाहिये। क्योंकि कोई भी अकेली मधुमक्खी शहद का निर्माण नही कर सकती है। इसी तरह मानव स्वभाव भी उसे संगठन में रहने का ही भाव देता है।
मनोज शर्मा "मन"
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