Tuesday, 6 October 2020

 जैसे कल की बात हो"


परमात्मा के आशीर्वाद से जिंदगी के उतार चढ़ाव
में कब कितने वर्ष बीत गये जैसे कल की ही बात हो।

मिलना दो अनजान का और फिर परिणय में बंध जाना
 फिर दो अनजान का एक जान एक सांस बन जाना।।
जैसे ...

खट्टी मीठी यादों के साथ फिर पड़ावों को पार कर जाना
कितनी भी बाधाये आये साथ उनमें अपना साथ निभाना।
जैसे..

मिले थे तो दो थे आज भरा पूरा परिवार बन जाना ।
जो पल साथ सोचे थे आज वो फलीभूत हो जाना।।
जैसे...

आज मित्र है परिवार है समाज है सब है हमारे पास।
पर समय पर तुम्हारा ही साथ सदा तुम्हारा ही नज़र आना 
जैसे...

कहते है रिश्ते आसमां से बन कर आते है सात जन्मों के।
सातों जन्मों तक उनको निभाना भी तुमको ही आता है।।
जैसे...

हर पल हर बरस एक एक फूल को अपने हाथ से संजोना
उन फूलों से आज एक सुंदर बगिया उपवन बना देना ।।
जैसे...

चहकती महकती हिरनी सी तुम उपवन में तब आई थी।
आज उपवन ही उपवन नही उसमे तुम्हारी चहक न हो।।
जैसे...

जीवन मे कोई शिकायत नही सदा हँसना और मुस्कराना 
ताकत बनी रही सुख दुख में सदा मेरे साथ सदा निभाना।
जैसे..

जीवन के कितने बसंत हर्ष उमंग से साथ साथ बीत गए।
पर तुम्हारा अब भी उसी तरह नई दुल्हन नज़र आना।।
जैसे....

मनोज शर्मा "मन"

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